कविता (क्या कसूर था मेरा ) // poor kids life
कविता (क्या कसूर था मेरा )
चोर तो नाम होता हैं उनका ,पर जिस्म से ज्यादा दिल पर चोट लगती है। ........
मै खडा इस उम्मीद में अकेले इस भीड़ में मदद कुछ मिल जाये !
दो निवाला न सही प्यास ही बुझ जाये जान जाने से पहले !!
क्या कसूर था मेरा जो तूने दी इतनी बड़ी सजा !
देना ही था तो मौत देते इस मतलबी दुनिया में भेजने से पहले !!
मुझे क्या पता था बरसात क्या होती होती है !
भीगा था उसी दिन रत भर उसे आसुओ में देखने के बाद !!
दर्द ये पेट की तलब क्या होती हैं !
जाना था उसी दिन भूख से तड़पने के बाद !!
सुबह का इंतजार उम्मीद जगा देती है !
रात्रि की पुकार एक घाव बना देती हैं !!
तिरस्कार , अपमान ,तड़प ,झड़प हमारी जिंदगी के अहम् पहलू है साहब !
सब भूल गया रोटी के दो टुकड़े पाने के बाद !!
दोस्त हमारे भी होते है पर वो दर्द ,दगा या अपमान नहीं देते !
हम तो हमेशा खुस रहते है उनके आने या जाने के बाद !!
महल नही उनके पास ,ईस्वर की दी हुई ऐसी जन्नत है जिसे आज के सुख सुभिधाओ की जरुरत नहीं!
एहसास तब हुआ , इतना खुस उसे देखने के बाद !!
रुक ये दोस्त ठहर जा ,क्यों भाग रहा है है इस भागम भाग जिंदगी में !
कितने खुस है वो ,
एक झलक उनको भी देख ले ,खुद ही समाझ जायेगा उन्हें देखने के बाद !!
तू बैठ इंतजार किसका करता है !
अपनी प्रिये के पत्र पर अश्रुधार क्यों करता है !!
क्या प्रिये ,क्या अश्रुधार ,क्या प्यार सब बेकार है !!!
चल ,मेरे साथ तू भी वाकिफ हो जायेगा उन्हें देखने के बाद !!!!
चोर तो नाम होता है साहब , पर जिस्म से ज्यादा दिल पर चोट लगती है !
जब बीत जाता है दिन बिन निवालो के ,नहीं कोसते वे किसी की हजारो ठोकरे खाने के बाद !!
मिले कोई तो दो निवाला खिला देना ,
सुन लेना उनके दर्द के सिलसिले को थोङा हौसला दिला देना!
है हसरत जितनी तुम्हारी बन जाना थोङी उम्मीद की किरण ,
समझ जाओगे उनके दर्द को भी थोङा समय बीतने के बाद!!
((
इश्क वो दरिया है जो तर जाये समुन्दर पार कर जाये !
गरीबी वो कलंक है जो पड़ जाएँ ,न जी पाए , न मर पाए ,!!
बीच मझधार में हमेशा तड़पता रह जाये !!!
))
मेरी तड़प, मेरा अकेला पन , मेरी प्यास सब बया करती है मेरी मुश्कन !
फिर क्यां गुनाह मेरा तूने ठोकर मार दी बिना कुछ कहने से पहले !!
क्या कसूर था मेरा जो तूने दी इतनी बड़ी सजा !
देना ही था तो मौत देते इस मतलबी दुनिया में भेजने से पहले !!
मुझे क्या पता था बरसात क्या होती होती है !
भीगा था उसी दिन रत भर उसे आसुओ में देखने के बाद !!
दर्द ये पेट की तलब क्या होती हैं !
जाना था उसी दिन भूख से तड़पने के बाद !!
सुबह का इंतजार उम्मीद जगा देती है !
रात्रि की पुकार एक घाव बना देती हैं !!
तिरस्कार , अपमान ,तड़प ,झड़प हमारी जिंदगी के अहम् पहलू है साहब !
सब भूल गया रोटी के दो टुकड़े पाने के बाद !!
दोस्त हमारे भी होते है पर वो दर्द ,दगा या अपमान नहीं देते !
हम तो हमेशा खुस रहते है उनके आने या जाने के बाद !!
महल नही उनके पास ,ईस्वर की दी हुई ऐसी जन्नत है जिसे आज के सुख सुभिधाओ की जरुरत नहीं!
एहसास तब हुआ , इतना खुस उसे देखने के बाद !!
रुक ये दोस्त ठहर जा ,क्यों भाग रहा है है इस भागम भाग जिंदगी में !
कितने खुस है वो ,
एक झलक उनको भी देख ले ,खुद ही समाझ जायेगा उन्हें देखने के बाद !!
तू बैठ इंतजार किसका करता है !
अपनी प्रिये के पत्र पर अश्रुधार क्यों करता है !!
क्या प्रिये ,क्या अश्रुधार ,क्या प्यार सब बेकार है !!!
चल ,मेरे साथ तू भी वाकिफ हो जायेगा उन्हें देखने के बाद !!!!
चोर तो नाम होता है साहब , पर जिस्म से ज्यादा दिल पर चोट लगती है !
जब बीत जाता है दिन बिन निवालो के ,नहीं कोसते वे किसी की हजारो ठोकरे खाने के बाद !!
मिले कोई तो दो निवाला खिला देना ,
सुन लेना उनके दर्द के सिलसिले को थोङा हौसला दिला देना!
है हसरत जितनी तुम्हारी बन जाना थोङी उम्मीद की किरण ,
समझ जाओगे उनके दर्द को भी थोङा समय बीतने के बाद!!
((
इश्क वो दरिया है जो तर जाये समुन्दर पार कर जाये !
गरीबी वो कलंक है जो पड़ जाएँ ,न जी पाए , न मर पाए ,!!
बीच मझधार में हमेशा तड़पता रह जाये !!!
))
मेरी तड़प, मेरा अकेला पन , मेरी प्यास सब बया करती है मेरी मुश्कन !
फिर क्यां गुनाह मेरा तूने ठोकर मार दी बिना कुछ कहने से पहले !!
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